जामताड़ा: झारखंड में मदरसों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में अब तक मदरसा बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इसका सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है जो मौलवी, आलिम और फ़ाज़िल की डिग्री हासिल करते हैं।
जानकारी के मुताबिक मौलवी की डिग्री पर किसी तरह की रोक नहीं है, लेकिन आलिम और फ़ाज़िल की डिग्री देने का अधिकार फिलहाल झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC Board) को प्राप्त नहीं है। नतीजतन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
इसी मुद्दे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमी (AIMIM) झारखंड के प्रदेश कार्यकारी सदस्य मोहम्मद सरफ़राज़ अहमद ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “यह पूरी तरह से सरकार की लापरवाही है। अब तक जिन विद्यार्थियों ने आलिम व फाज़िल की डिग्री हासिल की है, उन डिग्रियों को तुरंत मान्यता दी जाए। साथ ही बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी मदरसों को किसी विश्वविद्याय से अटैच किया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मदरसा बोर्ड का गठन नहीं होता, शिक्षा क्षेत्र में जुड़े हजारों छात्र पीछे रह जाएंगे। यह न सिर्फ मुसलमानों की तालीम से खिलवाड़ है, बल्कि सरकार की नाकामी भी है।

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