झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: नए अस्पतालों से पहले पुराने क्यों नहीं दुरुस्त?

झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: नए अस्पतालों से पहले पुराने क्यों नहीं दुरुस्त?

जामताड़ा: झारखंड में रिम्स-2 बनाए जाने की चर्चाएँ तेज़ हैं, लेकिन राज्य की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। प्रदेश के अधिकांश सदर अस्पतालों की हालत बद से बदतर बनी हुई है।मरीज़ों को न तो डॉक्टर आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, न ही पर्याप्त दवाइयाँ। वहीं आधुनिक लैब और जांच सुविधाओं का अभाव हालात को और गंभीर बना देता है। नतीजा यह होता है कि जब कोई मरीज़ इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुँचता है तो उसका सामना पहले ही रेफर की पर्ची से होता है। डॉक्टर अक्सर यही कहते हैं कि “यहां इलाज संभव नहीं है, सुविधा नहीं है।”

इसी मुद्दे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमी (AIMIM) झारखंड के संस्थापक सदस्य सह प्रदेश कार्यकारी सदस्य मोहम्मद सरफ़राज़ अहमद ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब मौजूदा अस्पतालों में ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, तो नए अस्पताल बनाने से आम जनता को क्या फ़ायदा होगा?उन्होंने आगे कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को सबसे पहले वर्तमान
 अस्पतालों की हालत सुधारनी चाहिए। डॉक्टरों की नियुक्ति, दवाओं की उपलब्धता और आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था जरूरी है, ताकि आम लोगों को प्राथमिक स्तर पर ही इलाज मिल सके और उन्हें रेफर की मजबूरी का सामना न करना पड़े।

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