ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन झारखंड संस्थापक सदस्य सह प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद सरफराज अहमद का बयान

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन झारखंड संस्थापक सदस्य सह प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद सरफराज अहमद का बयान

झारखंड में मौलवी फ़ाज़िल डिग्री को लेकर हेमन्त सोरेन सरकार पर उठे सवाल

जामताड़ा: झारखंड में मौलवी फ़ाज़िल डिग्री की मान्यता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिक्षाविदों, छात्रों और अल्पसंख्यक समाज से जुड़े संगठनों ने हेमन्त सोरेन सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।

आलोचकों का कहना है कि मौलवी फ़ाज़िल डिग्री लंबे समय से मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और रोज़गार का महत्वपूर्ण साधन रही है। ऐसे में इस डिग्री को बंद करना या मान्यता से वंचित करना हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल झारखंड के संस्थापक सदस्य सह प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद सरफराज अहमद ने कहा—
“राज्य सरकार ने जिस तरह मौलवी फ़ाज़िल डिग्री को नज़रअंदाज़ किया है, उससे साफ संदेश गया है कि अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा और करियर को सरकार प्राथमिकता नहीं दे रही। सरकार राजनीतिक दबाव में आकर ऐसे निर्णय ले रही है जो समाज को बांटने का काम करेंगे।”

उन्होंने चेतावनी दी—
“अगर सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर मौलवी फ़ाज़िल डिग्री की मान्यता बहाल नहीं की, तो यह मुद्दा बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है। यह कदम सरकार की शिक्षा नीति की नाकामी को उजागर करता है और सरकार को चाहिए कि बिना देर किए इस फैसले पर पुनर्विचार करे।”

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