जामताड़ा : बजट 2021-22 में अल्पसंख्यक समाज की अनदेखी की गई है । अल्पसंख्यकों के विकास, सशक्तिकरण, संवर्धन एवं संरक्षण के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है । ये बातें साहित्यकार परिषद के अध्यक्ष गाजी रहमतुल्लाह रहमत ने कही। उन्होंने कहा कि यह बजट बड़े उद्योगपतियों के लिए तैयार किया गया है ।आम लोगों के लिए इस बजट में कुछ भी खास नहीं है। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बहुत कम ध्यान दिया। जबकि बड़े उद्योग पतियों को आगे बढ़ाने के लिए बाजी लगा दी है। मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए किसी भी तरह का बजट नहीं पेश हुआ है । गाज़ी रहमत ने कहा कि बंगाल में राष्ट्रीय राजमार्ग योजना के तहत भर्तियों की बात की गई है और मेट्रो परियोजनाओं के तहत नए रोजगार की भी बात की गई है। इसे सिर्फ चुनाव को दृष्टिकोण में रखते हुए तैयार किया है । गरीबी उन्मूलन के तहत पूरक पोषण कार्यक्रम और पोषण अभियान को आपस में विलय करके मिशन पोषण चालू किए जाने की प्लानिंग अधूरी है ।इसे सिर्फ 112 जिलों के लिए तैयार किया गया है, जबकि कुपोषण को दूर करने के लिए सभी 726 जिलों को लेना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि अर्ध बेरोजगारी और छिपी हुई बेरोजगारी को दूर करने के लिए बजट में कोई आवंटन नहीं है। स्वच्छ हवा के लिए बजट में आवंटन को बढ़ाने की जरूरत थी और सिर्फ 42 शहरी केंद्रों पर विशेष ध्यान देने के बजाय कम से कम डेढ़ सौ शहरी केंद्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत थी क्योंकि डेढ़ सौ के करीब शहर ऐसे हैं जो औद्योगिक क्षेत्र में आते हैं और वहां प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस साल के बजट में विद्वान लोगों से सहमति नहीं ली गई है। आनन-फानन में बजट तैयार कर दिया गया है व उसे जनता के सामने पेश कर दिया गया है, जिसमें जनमानस को धोखे में रखकर उद्योगपतियों को बढ़ावा देने की पूरी पूरी योजना है।

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