अब्दुल कयूम अंसारी राष्ट्रीय एकता, अखंडता, समानता, सांप्रदायिक सौहार्द एवं समन्वयवादी विचारधारा के संवाहक तथा राष्ट्र की शान थे। उक्त बातें अल्पसंख्यक हितों के मुद्दों को ले कर आंदोलन करने वाले समाजसेवी एवं साहित्यकार गाज़ी रहमतुल्लाह रहमत ने उनकी पुण्यतिथि पर कही।उन्होंने कहा कि बाबू अब्दुल कयूम अंसारी ने अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए बहुत ही सराहनीय कार्य किया है खासकर बुनकरों के लिए उन्होंने योजनाएं बनाईं और युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे। श्री अंसारी 17 वर्षों तक बिहार के मंत्रिमंडल में कई विभागों के मंत्री रहे। बिहार केसरी श्री कृष्ण बाबू एवं बिहार विभूति अनुग्रह बाबू के सामने उन्होंने अल्पसंख्यक विकास हेतु कई योजनाएं रखी और उसे साकार रूप दिलाने में अब्दुल कयूम अंसारी का काफी रोल रहा है । गाजी रहमत ने कहा कि अंसारी जी सिर्फ एक नेता ही नहीं बल्कि पत्रकार, लेखक, कवि एवं सफल संपादक भी थे। उन्होंने अल् इस्लाह एवं मसावात नामक दो उर्दू पत्र साप्ताहिक एवं मासिक निकाले जिसमें सामाजिक सौहार्द्र, राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारा रोजगारोन्मुखी योजनाएं आदि विषयों पर रचनाएं हुआ करती थी।
उन्होंने कहा कि बाबू अब्दुल कयूम अंसारी के योगदान को राष्ट्र ने कुबूल किया और भारत सरकार ने उनके नाम पर सन 2005 में डाक टिकट भी जारी किया । उन्होंने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि बाबू अब्दुल कयूम अंसारी के सपनों को साकार करें और उनके विचारों के अनुकूल नीतियां एवम् पंचवर्षीय योजनाएं बनाएं ताकि सभी वर्गों को समुचित लाभ प्राप्त हो सके।
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