बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे मोटे तौर पर अब स्पष्ट हो चुके हैं। रुझानों में एनडीए को बहुमत मिल गया है तो महागठबंधन की सत्ता से दूरी बरकरार रहेगी। इस चुनाव में कई और चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर थी, जिनमें से कुछ चमक गए हैं तो कुछ मुरझा गए हैं। सबसे अधिक दावे करने वाले लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान पूरी तरह फ्लॉप हो गए हैं तो आखिरी समय में पाला बदलने वाले सन ऑफ मल्लाह काफी फायदे में दिख रहे हैं।
चिराग पासवान ने इस चुनाव में एनडीए से अलग होकर अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। लोक जनशक्ति पार्टी ने 134 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट हासिल करती नहीं दिख रही है। चिराग पासवान ने चुनाव में काफी बढ़चढ़कर दावे किए थे और नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि इस बार बीजेपी और एलजेपी की सरकार बनेगी और नीतीश कुमार जेल भेजे जाएंगे। हालांकि, चुनाव नतीजों ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।
सीमांचल में ओवैसी चमके
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। मुस्लिम बहुल सीटों पर उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है और उनकी पार्टी 5 सीटों पर कब्जा कर लिया है। एआईएमआईएम के प्रत्याशी अमौर, बैसी, कोचाधामन, बहादुरगंज और जोकीहाट सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं।
फायदे में मुकेश साहनी
सन ऑफ मल्लाह नाम से फेसम विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश साहनी फायदे में दिख रहे हैं। महागठबंधन की ओर से शीट शेयरिंग में नजरअंदाज किए जाने की वजह से नाराज साहनी ने महागठबंधन के प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही साथ छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद वह एनडीए में शामिल हो गए। इस लिहाज से माना जा रहा है कि मुकेश साहनी काफी फायदे में रहे और बिना किसी शोर-शराबे, आरोप-प्रत्यारोप के उन्होंने चिराग से काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।

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